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Hanuman Chalisa In Hindi Lyrics Image

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श्री विन्ध्याचल चालीसा लिरिक्स - Shree Vindheshwari Chalisa Lyrics Hindi

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श्री विन्ध्याचल चालीसा लिरिक्स || दोहा || नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदंब संत जनों के काज में, करती नहीं विलंब॥ || चौपाई || जय जय जय विन्ध्याचल रानी।  आदि शक्ति जगबिदित भवानी॥ सिंह वाहिनी जय जगमाता।  जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥ कष्ट निवारिनि जय जग देवी।  जय जय संत असुर सुरसेवी॥ महिमा अमित अपार तुम्हारी।  सेष सहस मुख बरनत हारी॥ दीनन के दु:ख हरत भवानी।  नहिं देख्यो तुम सम कोउ दानी॥ सब कर मनसा पुरवत माता।  महिमा अमित जगत विख्याता॥ जो जन ध्यान तुम्हारो लावे।  सो तुरतहिं वांछित फल पावे॥ तू ही वैष्णवी तू ही रुद्रानी।  तू ही शारदा अरु ब्रम्हाणी ॥ रमा राधिका श्यामा काली।  तू ही मात संतन प्रतिपाली॥ उमा माधवी चंडी ज्वाला।  बेगि मोहि पर होहु दयाला॥ तुम ही हिंगलाज महारानी।  तुम ही शीतला अरु विज्ञानी॥ तुम्हीं लक्ष्मी जग सुख दाता।  दुर्गा दुर्ग विनाशिनी माता॥ तुम ही जानवी अरु इन्द्राणी ।  हेमावती अंबे निरवाणी॥ अष्टभुजा बाराहिनि देवा।  करत विष्णु शिव जाकर सेवा॥ चौसट्टी देवी कल्याणी।  गौरि मंगला सब गुन खानी॥ पाटन मुंबा दंत कुमारी।  भद्रकाली सुन विनय हमारी॥ बज्रधारिनी शोक नासिनी।  आयु रक्षिणी विन्

चालीसा संग्रह - Chalisa Sangrah

चालीसा संग्रह 1. हनुमान चालीसा - Hanuman Chalisa   2. दुर्गा चालीसा -Durga Chalisa 3. शिव चालीसा Shiv Chalisa

श्री दुर्गा चालीसा लिरिक्स - Shree Durga Chalisa Lyrics Hindi

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श्री दुर्गा चालीसा लिरिक्स नमो नमो दुर्गे सुख करनी  नमो नमो अम्बे दुःख हरनी  निरंकार है ज्योति तुम्हारी  तिहूं लोक फैली उजियारी  शशि ललाट मुख महाविशाला  नेत्र लाल भृकुटि विकराला  रूप मातु को अधिक सुहावे  दरश करत जन अति सुख पावे  तुम संसार शक्ति लै कीना  पालन हेतु अन्न धन दीना  अन्नपूर्णा हुई जग पाला  तुम ही आदि सुन्दरी बाला  प्रलयकाल सब नाशन हारी  तुम गौरी शिवशंकर प्यारी  शिव योगी तुम्हरे गुण गावें  ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें  रूप सरस्वती को तुम धारा  दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा  धरयो रूप नरसिंह को अम्बा  परगट भई फाड़कर खम्बा  रक्षा करि प्रह्लाद बचायो  हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो  लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं  श्री नारायण अंग समाहीं  क्षीरसिन्धु में करत विलासा  दयासिन्धु दीजै मन आसा  हिंगलाज में तुम्हीं भवानी  महिमा अमित न जात बखानी  मातंगी धूमावति माता  भुवनेश्वरी बगला सुख दाता  श्री भैरव तारा जग तारिणी  छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी केहरि वाहन सोह भवानी  लांगुर वीर चलत अगवानी  कर

हनुमान चालीसा लिरिक्स लिखित सम्पूर्ण - Hanuman Chalisa Lyrics

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हनुमान चालीसा लिरिक्स लिखित सम्पूर्ण ॥ दोहा ॥  श्री गुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।  बरनउँ रघुबर विमल जसु जो दायक फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।   बल बुद्धि विध्या देहु मोहिं हरहु कलेश विकार ॥ Shri Hanuman Chalisa in Hindi Lyrics  Hanuman Chalisa  Lyrics photo ॥चौपाई॥  जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।   जय कपीश तिहुँ लोक उजागर ॥१॥ राम दूत अतुलित बल धामा ।  अंजनिपुत्र पवनसुत नामा ॥२॥    महावीर विक्रम बजरंगी ।  कुमति निवार सुमति के संगी ॥३॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा ।  कानन कुण्डल कुंचित केसा ॥४॥   हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥ शंकर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग वन्दन ॥६॥   विध्यावान गुनी अति चातुर ।  राम काज करिबे को आतुर ॥७॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥   सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।  बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥९॥ भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥  लाय संजीवन लखन जियाये ।  श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥ रघुपति

शिव चालीसा - Shiv Chalisa In Hindi - Shiv Chalisa Lyrics - Shiv Chalisa Pdf

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शिव चालीसा - Shiv Chalisa ॐ नमः शिवाय ,ॐ नमः शिवाय  श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान  कहत  अयोध्यादास तुम, देहू अभय वरदान  जय  गिरिजा पति दिन दयाला सदा करत संतन प्रतिपाला || भाल चंद्रमा सोहात नीके  कानन कुंडल नागफनी के || अंग गौर शिर गंग बहाए  मुण्डमाल तन छार लगाए || वस्त्र खाल वाघम्बर  सोहे  छवि  को देख नागमुनि मोहे || मैना मातू  की हवै दुलारी बाम अंग सोहत छवि न्यारी || कर त्रिशूल सोहत छवि भारी  करत सदा शत्रून क्षयकारी || नंदी गणेश सोहे तहँ कैसे सागर मध्य कमल हैं जैसे || कार्तिक श्याम और गणराऊ  या छवि को कही जात न काऊ || देवन जबहि जाय पुकारा  तबही दुःख प्रभु आप निवारा || किया उपद्रव तारक भारी  देवन सब मिली तुमही जुहारी || तुरत षडानन आप पठायउ लवनिमेश महं मारी गिरायऊ || आप जलंधर असुर संहारा सुयश तुम्हार वीदित संसारा || त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई  सबही कृपा कर लींन बचाई || किया तपही भागीरथ भारी  पूर्ण प्रतिज्ञा तसू पुरारी || दानीन महं तुम सम कोऊ नाहीं  सेवक स्तुति करत सदाहीं || वेद न