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कव्वाली भजन - Qawwali Bhajan

कव्वाली भजन  चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा क़व्वाली लिरिक्स दुश्मनी की तो क्या पूछिये दोस्ती का भरोसा नहीं गज़ल लिरिक्स मेरी जान जाये वतन के लिए क़व्वाली लिरिक्स उड़ जायेगा एक दिन पंछी  रहेगा पिंजरा खाली लिरिक्स

उड़ जायेगा एक दिन पंछी रहेगा पिंजरा खाली लिरिक्स - Ud jayega ek Din Panchi Rahega pijara khali Lyrics

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उड़ जायेगा एक दिन पंछी  रहेगा पिंजरा खाली लिरिक्स तू लाख इफाजत करले  तू लाख करे रखवाली  उड़ जायेगा एक दिन पंछी  रहेगा पिंजरा खाली  ना कोई शौहरत होगी  ना कोई गुमान होगा  जो दौलत आज है तेरी  ओ कल गैरो का धन होगा  तू लाख इफाजत करले  तू लाख करे रखवाली  उड़ जायेगा एक दिन पंछी  रहेगा पिंजरा खाली  जायेगा जब जान तेरी  रूह का बेजान तन होगा  जला देंगे तुझे आग में  बस जला बदन होगा  तू लाख इफाजत करले  तू लाख करे रखवाली  उड़ जायेगा एक दिन पंछी  रहेगा पिंजरा खाली  जिसको देखा मौत ने तो  फिर ओ बचता है कहा  कोई आगे कोई पीछे  सबको जाना है वहा तू लाख इफाजत करले  तू लाख करे रखवाली  उड़ जायेगा एक दिन पंछी  रहेगा पिंजरा खाली  ना काम आयेंगे तेरे  दुनिया के सब रिश्ते नाते  धरा रह जायेगा सब ठाठ तेरा  तू क्यों इतराए दीवाने तू लाख इफाजत करले  तू लाख करे रखवाली  उड़ जायेगा एक दिन पंछी  रहेगा पिंजरा खाली  ना कुछ अहसाह है  जस्बा  ना कोई करीना है  नहीं जीने का कुछ मकसद  तो फिर बेकार जीना है  जिओ इस तरह के  ये जिंदगी औरो के काम आये  जलाओ ऐसी शम्मा जो  रोशनी औरो के काम आये  यही नेकी भलाई जो कुछ है  तेरे साथ जायेगा  अलावा

मेरी जान जाये वतन के लिए क़व्वाली लिरिक्स - Meri Jaan Jaye Watan Ke Liye Qawwali Lyrics

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मेरी जान जाये वतन के लिए क़व्वाली लिरिक्स *शायरी*   ये धरती माँ है मेरी  के अलग ऐलान लिख देना  मेरी इस जिन्दगी पे   इसके है ऐहसान है लिख देना  ये किस का मकबरा है  दुनिया वाले जान जायेंगे  मेरी कब्र के पत्थर पर  हिन्दुस्तान लिख देना  बहे खून मेरा चमन के लिए चमन के लिए... मेरी जान जाये वतन के लिए  मेरा दिल जिगर और मेरी जान भी  मेरी जान भी  है कुर्बान कंधो चमन के लिए  मेरी जान जाये वतन के लिए  भरत राम की तरह करलो मिलाप  करलो मिलाप ..... हो इतना करम संघटन के लिए  मेरी जान जाये वतन के लिए  जो सरहद पे मुझको शहादत मिले  ना  मै हुस्न की अंजुमन चाहता हु  ना  मै यारी प्यारी दुल्हन चाहता हु  ना मै चाँद जैसा ललन चाहता हु  ना मै रोशनी की किरण चाहता हु  ना बस्ती ना सेहरा ना बन चाहता हु  ना मै आलिशान भवन चाहता हु  ना  मै किमती पैरंहण चाहता हु ना  मै पैसा गाड़ी ना धन  चाहता हु   खुदा मै तो ये ही चमन चाहता हु  यही धरती गम वो चमन चाहता हु  जो सरहद पे मुझको शहादत मिले  शहादत मिले ... तिरंगा उढाना कफ़न के लिए  मेरी जान जाये वतन के लिए  बहे खून मेरा चमन के लिए चमन के लिए... मेरी जान जाये वतन के लिए  मेरी जान

दुश्मनी की तो क्या पूछिये दोस्ती का भरोसा नहीं गज़ल लिरिक्स - Dosti Ka Bharosa Nhi Gazal Lyrics

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दुश्मनी की तो क्या पूछिये दोस्ती का भरोसा नहीं गज़ल लिरिक्स दुश्मनी की तो क्या पूछिये दोस्ती का भरोसा नहीं. आप मुझ से भी पर्दा करें, अब किसी का भरोसा नही. कल ये मेरे भी आँगन में थी, जिसपे तुमको गुरूरआज है. कल ये शायद तुझे छोड़ दे, इस ख़ुशी का भरोसा नही. शायरी  मुश्किल कोई आन पड़ी तो घबराने से क्या होगा ! जीने की तरक़ीब निकालो मर जाने से क्या होगा !! क्या ज़रूरी है हर रात में, चाँद तुमको मिले जानेजाँ. जुगनुओं से भी निस्बत रखो, चाँदनी का भरोसा नही. रात दिन मुस्तकिल कोशिशें, ज़िन्दगी कैसे बेहतर बने. इतने दुख ज़िन्दगी के लिये, और इसी का भरोसा नही. शायरी सच मेरे बारे में था तो कितना अच्छा था ! तेरे बारे में बोला तो कड़वा लगता है !! ये तकल्लुफ भला कब तलक, मेरे नज़दीक आ जाइये. कल रहे न रहे क्या पता, ज़िन्दगी का भरोसा नहीं. पत्थरों से कहो राज़-ए- दिल, ये ना देंगे दवा आप को. ऐ नदीम आज के दौर में, आदमी का भरोसा नही. दुश्मनी की तो क्या पूछिये दोस्ती का भरोसा नहीं गज़ल लिरिक्स  Dushmani Ki To Kya Puchhiye Dosti Ka Bharosa Nhi Gazal Lyrics Singer- rayis Anis Sabri

चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा क़व्वाली लिरिक्स - Chadta Suraj Dheere Dheere Dhalta hai Dhal Jayega Qawwali Lyrics

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चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा क़व्वाली लिरिक्स आज जवानी पर इतराने वाले कल पछतायेगा चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा  ढल जायेगा  ढल जायेगा... तू यहाँ मुसाफिर है ये सराये  फानी  है  चार दिन की  मेहमां ये तेरी जिंदगानी है  ज़र जमी ज़र जेवर कुछ ना साथ जायेगा  खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा  जानकर भी अंजाना बन रहा है दीवाने  अपनी उम्र ए फानी पर तन रहा है दीवाने  किस कदर तू खोया है इस जहान के मेले में   तू खुदा  को भुला है फंस के इस झमेले में  आज तक ये देखा है पाने वाला खोता है  जिंदगी को जो समझा जिन्दगी पे रोता है  मिटनेवाली दुनिया का एतबार करता है  क्या समझ के तू आखिर इसे प्यार करता है  अपनी अपनी फ़िक्र में जो भी है वो उलझा है जिंदगी हकीकत में क्या है कौन  समझा है  आज समझले ... आज समझले कल ये मौका हाथ न येरे आयेगा  ओ गफ़लत की नींद में सोनेवाले धोखा खायेगा  चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा  मौत ने ज़माने को ये समा दिखा डाला  कैसे कैसे रुस्तम को खाक में मिला डाला  याद रख सिकंदर के हौसले तो आली थे  जब गया