हर रात्रि शिवरात्रि है लिरिक्स - Har Ratri Shivratri Hai Lyrics
हर रात्रि शिवरात्रि है लिरिक्स
तीन लोक के मालिक शिव हैं,इस दुनिया के चालक शिव हैं।
तीन लोक के मालिक शिव हैं,
इस दुनिया के चालक शिव हैं।
शिव है रस्ता, शिव है मंज़िल,
हम तमाम मामूली यात्री हैं।
हर दिन शिव का दिन है बंदे,
हर रात्रि शिवरात्रि है।
बारिश की टिप-टिप में शंकर,
पत्तों की खड़-खड़ में शंकर।
जैसे विदेश, शहर, गाँव में बसते हैं,
जैसे विदेश, शहर, गाँव में बसते हैं,
घर-घर में शंकर।
तू ही तो मेरी पहली उम्मीद है,
तू ही सहारा आखरी है।
हर दिन शिव का दिन है,
हर दिन शिव का दिन है,
बंदे, हर रात्रि शिवरात्रि है।
तन में शंकर मन में शंकर,
मेले में शंकर वन में शंकर।
देखन वाली आँख जावे,
दिखते हैं कण-कण में शंकर।
जीवन मरण के दाता शंकर,
साँसे हैं सबकी चलाता शंकर।
रविराज से, हंसराज से,
रविराज से, हंसराज से,
खुद है भजन बनवाता शंकर।
रविराज से, हंसराज से,
रविराज से, हंसराज से,
खुद है भजन बनवाता शंकर।
राजा बना के रखा है शिव ने,
राजा बना के रखा है शिव ने,
करते हम उसकी चाकरी है।
हर दिन शिव का दिन है, बंदे,
हर दिन शिव का दिन है, बंदे,
हर रात्रि शिवरात्रि है।
हर दिन शिव का दिन है, बंदे,
हर रात्रि शिवरात्रि है।
Shiv ji Ke bhakti Bhajan Song Details
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