महाकाल के दर का क्या कहना लिरिक्स - Mahakal Ke Dar ka kya Kahna Lyrics

महाकाल के दर का क्या कहना लिरिक्स

महाकाल के दर का क्या कहना
दर पे जो दीवाने आते हैं
किस्मत से भी ज्यादा मिलता उन्हें
झोली जो यहां फैलाते हैं
महाकाल के दर का क्या कहना

दिन-रात दीवानों की टोली
दरबार में तेरे आती है
झुकते हैं करोड़ों शीश यहां
उनकी सारी बला टल जाती है
महाकाल के दर का क्या कहना

झूठी दुनिया यह समझ ना पाया मैं
रिश्ते दौलत के यह समझ ना पाया मैं
जब खुद को अकेला पाया है
मेरे संग नजर तू आया है
महाकाल के दर का क्या कहना

अखियां है निराली महाकाल तेरी
जिस पर तेरी नजर हो जाती है
ऐसा जादू तुम्हारी अंखियों में
तकदीरे बदल दी जाती है
महाकाल के दर का क्या कहना

तुम्हरे जैसा कोई नहीं है अलख निरंजन राजा
मंदिर पर सोने का कलश है
चांदी का दरवाजा
तेरे दर की निराली शान बड़ी

जिस पर भी हो गई मेरे महाकाल की नजर
फिर छू भी नहीं पाती उसको काल की नजर
तेरे दर की निराली शान बड़ी

और ऐसी निराली शान है 
मेरे बाबा महाकाल के दरबार की
कैसी

दुनिया से हार कर जो तेरे दर पर आते हैं
हरा ना पाए कोई जिनको यह बनाते हैं
तुम जीता देते हो हारे हुए इंसानों को
दया को तेरी वह महसूस करके जाते हैं
इस दर की निराली शान बड़ी

जिस पे तेरी नजर हो जाती है
ऐसा जादू तुम्हारी नजरों में
तकदीरे बदल दी जाती है
महाकाल के दर का क्या कहना
दर पे जो दीवाने आते हैं

महाकाल के दर का क्या कहना
महाकाल के दर का क्या कहना


Shiv   ji Ke bhakti Bhajan Song Details

 Song  :- Mahakal Ke Dar ka kya Kahna

 Singer:- Bittu Maharaj

 Lyrics  :-Bittu Maharaj

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