सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची आरती लिरिक्स - Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi Aarti Lyrics
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची आरती लिरिक्स
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥ १ ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती।
जय देव जय देव॥ (ध्रुवपद)
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥ २ ॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती।
जय देव जय देव॥
लंबोदर पीतांबर फणिवरवंदना।
लंबोदर पीतांबर फणिवरवंदना।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।