मै तो हवा हूं किस तरह पहरे लगाओगे लिरिक्स - Mai Toh Hawa Hoon Kis Tarah Pehre Lagaoge Lyrics
मै तो हवा हूं किस तरह पहरे लगाओगे लिरिक्स
अब कहां हूं कहां नहीं हूं मैंजिस जगह हूं वहां नहीं हूं मैं
कौन आवाज दे रहा है मुझे
कोई कह दे के यहां नहीं हूं मैं
क्योंकि मैं हवा हूं कहां वतन मेरा
दस्त मेरा ना चमन मेरा
वर्ग गुल पर चराग सा क्या है
छू गया जिसे दहन मेरा
मैं तो हवा हूं किस तरह
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
कागज की इस लिबाज को
बदन से उतार दो
क्योंकि पानी बरस गया तो
किसे मुंह दिखाओगे
मैं तो हवा हूं किस तरह
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
दुख क्यों किसी गरीब का
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
दुख क्यों किसी गरीब का
हसते हो देख कर
करवट जो वक्त लेगा
तो सब भूल जाओगे
मैं तो हवा हूं किस तरह
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
मैं तो हवा हूं किस तरह
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
मैं ना रहूंगा एक दिन
ऐसा भी आएगा
क्योंकि मैं जो मैं कहता हूं
कि मैं ना रहूंगा क्योंकि
मैं मैं ही नहीं हूं तो कहां से रहूंगा?
मैं ही नहीं हूं तो कहां से रहूंगा?
कहा जाता है कि मैं खाने में बैठे हैं
और मैं को ही तरसते हैं।
माहौल है फूलों का पर पत्थर से बरसते हैं।
मैं ना रहूंगा एक दिन।
ऐसा भी आएगा।
हम ना रहेंगे एक दिन
ऐसा भी आएगा।
तस्वीर को गले से मेरी
तुम लगाओगे।
मैं तो हवा हूं किस तरह
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
मैं तो हवा हूं किस तरह
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
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